” इश्क़ “

कहर के तमाम मोहरों के बीच ,

मैं इश्क़ का दाँव लाया हूँ !

लाखों के सौदे वाली चीज ,

महज़ कुछ पैसों के भाव लाया हूँ !

हिंसा की बेज़ार गलियों में ,

सुखन की छाँव लाया हूँ !

तेरे नफरत भरे शहर में ,

मैं मोहब्बत का गाँव लाया हूँ !

( संकलित )

—– राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

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