” अश्क़ ( आँसू )

अश्क़ वो मोती हैं जो नयनों में पला करते हैं,

भाव जो दिल को मथ जाएं तो ये नुमा होते हैं !

सुख हो या दुख हो ये हर पलों के हैं साखी,

भाव दर्शाने में रखते नहीं कुछ भी बाकी !

प्यार के बोल औ स्पर्श से थम जाते हैं ,

दर्द का दायरा गहरा हो तो जम जाते हैं !

अपने पराये का कभी भेद नहीं करते हैं ,

बिना कहे ही चुपचाप कहा करते हैं !

( संकलित )

—- राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

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