मुझे जताना नहीं आता !
आँसुओं को पीना पुरानी आदत है ,
मुझे आँसू बहाना नहीं आता !
लोग कहते हैं मेरा दिल है पत्थर का,
इसलिए इसको पिघलाना नहीं आता !
अब क्या कहूँ मैं ,
क्या आता है , क्या नहीं आता !
बस मुझे मौसम की तरह ,
बदलना नहीं आता !
( संकलित )
—- राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
