ये ना सोचो कभी मैं ठहर जाऊँगा ,
रोशनी देकर तुम्हें मैं गुज़र जाऊँगा !
खाक़ भी ना मेरी कभी छू पाओगे ,
आसमाँ से भी आगे निकल जाऊँगा !
ग़ज़ल के रूप में , गीत के रूप में ,
दिल की गहराइयों में उतर जाऊँगा !
महकता ही रहूँगा दिलों में सदा ,
प्यार के रंग दुनिया में भर जाऊँगा !
दर्द चाहे मिला हो ,सबसे ज्यादा मुझे ,
पर खुशी बाँट कर मैं बिखर जाऊँगा !
( संकलित )
—- राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !
