” ढूंढता है “

ज़मी का सितारा आसमान ढूंढता है

वो अपनी ज़िंदगी में एक मकाम ढूढ़ता है ,

बड़ा बेचैन सा रहता है आजकल अक्सर

ज़रा सुकून, ज़रा सा आराम ढूंढता है ,

दिल किसी चीज में लगता तो नहीं है लेकिन

दिल लगाने के बहाने तमाम ढूंढता है ,

उसके कुछ कायदे दुनिया से जुदा हैं बिल्कुल

वो एक शख्स में सारा जहान ढूंढता है !!

( संकलित )

—– राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

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