मोम के बंधन सजीले ,
पंथ की बाधा बनेंगे ,
तितलियों के पर रंगीले ,
विश्व का क्रंदन भुला देगी
मधुप की मधुर गुनगुन ,
क्या डुबो देंगे तुझे
यह फूल दे दल ओस गीले ,
तू न अपनी छाँह को
अपने लिए कारा बनाना !!
—– प्रसिद्ध कवियत्री महादेवी वर्मा
( संकलित )
—– राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

