Uncategorized ” एक रुबाई “ YugVaibhav May 7, 2024 अफ़सोस नहीं इसका हमको , जीवन में हम कुछ कर न सके , झोलियाँ किसी की भर न सके , संताप किसी का हर न सके अपने प्रति सच्चा रहने का , जीवन भर हमने काम किया , देखा —देखी हम जी न सके , देखा— देखी हम मर न सके !! —————- गोपाल सिंह नेपाली ( संकलित ) ———- राम कुमार दीक्षित , पत्रकार ! Post Views: 153