” जुगनू ने सारे बंदरों को हरा दिया “

एक जुगनू उड़ता हुआ जा रहा था  ! रास्ते में उसे एक घमंडी बन्दर मिला  ! दोनों ने एक दूसरे की कुशलता  जानी  ! बन्दर ने आदत के अनुसार अपनी बड़ाई की और जुगनू को कायर कहना शुरू कर दिया  ! इस पर जुगनू क्रोध में लाल– पीला हो गया  ! उसने चिल्लाकर कहा  , ‘ कल तुम अपने साथियों सहित नदी किनारे चले आओ  ! मैं अकेला ही रहूँगा  ! वहीं इस बात का फैसला हो जायेगा कि कौन कायर है और कौन शूरवीर  !

दूसरे दिन रात के समय बन्दर अपने साथियों को लेकर नदी के किनारे पहुंचा  ! वहाँ उन्होंने एक जुगनू को प्रतीक्षा करता हुआ पाया  ! बन्दर ने अपने साथियों को एक पंक्ति में खड़ा कर दिया और स्वयं सबसे आगे खड़ा हो गया  ! उन सबके हाथों में बड़े– बड़े  मुगदर थे  !  फिर बन्दर ने अपने साथियों को जुगनू की ओर बढ़ने और उस पर हमला करने का आदेश दिया  ! जुगनू बड़ा चतुर था  ! वह अपना प्रकाश बंद कर धीरे से घमंडी बन्दर की नाक पर बैठ गया  !

अगले ही क्षण बन्दर की नाक पर वह चमकने लगा  ! घमंडी बन्दर के पास खड़े हुए बन्दर ने जुगनू को मारने के लिए अपना मुगदर उठाया और उसकी नाक पर दे मारा  ! इसी बीच जुगनू उड़ गया और मुगदर घमंडी बन्दर की नाक पर जोर से पड़ा  ! उसका सिर चकरा गया  और वह लड़खड़ा कर गिर पड़ा  ! इसी तरह बारी– बारी सारे बन्दर जुगनू की चालाकी से धरती पर गिर पड़े  ! इस छोटी सी कहानी से  यही सीख मिलती है कि  हमेँ  भी कभी घमंड नहीं करना चाहिए  !  अहंकार किसी को भी पसंद नहीं आता  !  समाज में हम भी ऐसे लोगों से  दूर रहने की कोशिश करते हैं जो बात– बात में अपना अहंकार दिखाते रहते हैं  !  हमें लोगों से प्रेम पूर्वक व्यवहार करना चाहिए जिससे हम लोगों से जुड़ सकें  ! जहाँ तक सम्भव हो सके, हम अहंकार शून्य होकर जरूरतमंद लोगों की मदद करें तो परमात्मा को पाने की यही सरल  साधना  हमारे लिए हो जायेगी  !

 

————-  राम कुमार दीक्षित , पत्रकार  , पुणे  !