घने जंगल में जंगली भैंसों का एक विशाल झुंड चर रहा था। सूरज की किरणें पेड़ों के बीच से छनकर ज़मीन पर पड़ रही थीं, और हवा में मिट्टी की हल्की-सी खुशबू फैली थी।
उसी झुंड में एक नन्हा-सा बछड़ा अपने पिता के साथ चल रहा था। अचानक उसने उत्सुकता से पूछा —
“पिता जी, क्या इस जंगल में ऐसी कोई चीज़ है जिससे हमें डरना चाहिए?”
भैंसा मुस्कुराया और बोला —
“हाँ बेटा, बस शेर से सावधान रहना। जंगल का असली राजा वही है।”
बछड़े ने हैरानी से कहा —
“शेर? मैंने सुना है वो बहुत खतरनाक होते हैं! अगर मुझे कभी शेर दिखा तो मैं तो भाग जाऊँगा!”
भैंसा गंभीर होकर बोला —
“नहीं बेटा, भागना सबसे बड़ी गलती होगी।”
बछड़ा चौंका —
“क्या! भागना गलती कैसे? अगर वो मुझे मार सकता है तो मैं अपनी जान क्यों न बचाऊँ?”
भैंसा धीमी आवाज़ में बोला —
“अगर तुम भागोगे, तो शेर तुम्हारा पीछा करेगा। भागते हुए वो तुम्हारी पीठ पर झपटेगा और तुम गिर जाओगे। एक बार गिरे — तो फिर उठ नहीं पाओगे।”
बछड़े की आँखें चौड़ी हो गईं —
“तो फिर मुझे क्या करना चाहिए?”
भैंसा बोला —
“जब कभी शेर का सामना हो, तो अपनी जगह डटकर खड़े रहना। डर दिखाना नहीं। अपनी सींगें ऊँची करना, ज़मीन पर खुर पटकना, और अगर ज़रूरत पड़े तो पूरी ताक़त से उसकी ओर बढ़ जाना। याद रखना — डर के आगे जीत है।”
बछड़ा थोड़ा घबरा गया —
“लेकिन अगर शेर पलट कर मुझ पर हमला कर दे तो?”
भैंसा मुस्कुराया —
“बेटा, ज़रा अपने चारों तरफ देखो।”
बछड़े ने सिर घुमाया — और देखा — चारों ओर ताकतवर भैंसें खड़ी थीं, उनकी साँसों से भाप निकल रही थी, और उनकी नज़रें साहस से भरी थीं।
भैंसा बोला —
“देखो बेटा, अगर तुम भागोगे तो हम कुछ नहीं कर पाएंगे। लेकिन अगर तुम खड़े रहोगे, तो हम सब तुम्हारे साथ खड़े रहेंगे। क्योंकि *परिवार और दोस्त वही होते हैं जो मुश्किल वक्त में तुम्हारे पीछे खड़े रहें!*”
बछड़े की आँखों में चमक आ गई। उसने गहरी साँस ली और सिर झुका कर कहा —
“धन्यवाद, पिता जी। अब मैं कभी किसी शेर से नहीं डरूँगा।”
🌅 और यही जीवन का सच है —
हम सबकी ज़िंदगी में भी “शेर” होते हैं — परेशानियाँ, डर, नाकामियाँ, और असफलताएँ।
अगर हम उनसे भागते हैं तो वे हमारा पीछा करती हैं।
लेकिन अगर हम हिम्मत से उनका सामना करते हैं —
तो पीछे हमारा परिवार और हमारे दोस्त हमारी सबसे बड़ी ताक़त बनकर खड़े रहते हैं।
इसलिए…
👉 भागो मत — डटकर खड़े रहो!
👉 डर को देखो और कहो — “मैं तैयार हूँ!”
👉 क्योंकि जब तुम साहस दिखाते हो — तुम्हारे अपने तुम्हारे साथ खड़े हो जाते हैं।
परिवार और दोस्त सिर्फ रिश्ते नहीं होते, वे हमारी ढाल हैं। जब तुम डटकर लड़ते हो — वे तुम्हारे पीछे पूरी ताक़त से खड़े रहते हैं।
- राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
