लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती !
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती !
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है ,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ,
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना, न अखरता है ,
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती !
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती !
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है ,
जा जा कर, खाली हाथ, लौटकर आता है ,
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में ,
बढ़ता दुगुना उत्साह इसी हैरानी में ,
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती !
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती !
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो ,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ,
जब तक न सफल हो नींद चैन को त्यागो तुम ,
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम ,
कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती !
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती !
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती !!
* रचनाकार श्री सोहनलाल द्विवेदी
( संकलित )
* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
