” सीमा में रहना ही समझदारी है “

एक छोटे से गाँव में रमेश नाम का युवक रहता था। वह बहुत महत्वाकांक्षी था। उसकी इच्छा थी कि कम समय में बहुत बड़ा आदमी बन जाए। इसी लालच में वह हर काम एक साथ करने की कोशिश करता। कभी खेती, कभी व्यापार, कभी शेयर बाज़ार तो कभी नए-नए बिज़नेस। लेकिन किसी भी काम में धैर्य और अनुशासन नहीं रखता था।

उसके पिता हमेशा समझाते, “बेटा, हर काम की एक सीमा होती है। जो व्यक्ति अपनी क्षमता और मर्यादा पहचानकर चलता है, वही सफल होता है।”

लेकिन रमेश को लगता था कि बड़े सपने देखने वालों के लिए कोई सीमा नहीं होती। उसने पिता की बात अनसुनी कर दी।

एक दिन वह दूसरे शहर जा रहा था। रास्ते में शाम हो गई। उसने एक वृद्धा के छोटे से ढाबे पर रात बिताने का निर्णय लिया। वृद्धा ने भोजन कराया और आराम करने के लिए चारपाई दिखाई।

रमेश ने पूछा, “माँजी, चारपाई पर सोने का कितना किराया है?”

वृद्धा मुस्कुराकर बोली, “सिर्फ दस रुपये।”

रमेश ने सोचा, “चारपाई पर क्यों सोऊँ? नीचे ज़मीन पर चादर बिछा लूँगा। पैसे भी बच जाएंगे।”

उसने पूछा, “अगर मैं ज़मीन पर सो जाऊँ तो?”

वृद्धा ने शांत स्वर में कहा, “तब बीस रुपये लगेंगे।”

रमेश हैरान रह गया। उसने पूछा, “यह कैसी बात हुई? चारपाई सस्ती और ज़मीन महँगी?”

वृद्धा ने मुस्कुराकर उत्तर दिया, “बेटा, चारपाई की अपनी सीमा है। उस पर सोने वाला उतनी ही जगह घेरता है। लेकिन ज़मीन पर सोने वाला कभी इधर फैलता है, कभी उधर। उसकी कोई सीमा नहीं रहती। जीवन भी ऐसा ही है। जो अपनी इच्छाओं, खर्चों और व्यवहार को सीमित रखता है, वही सुखी रहता है। जिसकी इच्छाएँ असीम हो जाती हैं, उसकी परेशानियाँ भी असीम हो जाती हैं।”

वृद्धा की बात रमेश के दिल में उतर गई। उसे अपने पिता की सीख याद आ गई। उसने समझ लिया कि उसकी असफलता का कारण मेहनत की कमी नहीं, बल्कि अनुशासन और सीमाओं की अनदेखी थी।

घर लौटने के बाद उसने एक ही काम पर ध्यान दिया। मेहनत, धैर्य और अनुशासन के साथ खेती शुरू की। धीरे-धीरे उसकी फसल अच्छी होने लगी। कुछ वर्षों में वही रमेश पूरे इलाके का सफल किसान बन गया। अब वह हर युवा से केवल एक ही बात कहता था—

“सपने जरूर देखो, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए अपनी सीमाओं, क्षमता और धैर्य को कभी मत भूलो।”

 

जीवन में मर्यादा, अनुशासन और संतोष सबसे बड़ी पूँजी हैं।
जो व्यक्ति अपनी सीमाओं का सम्मान करता है, वही सच्ची सफलता और स्थायी सुख प्राप्त करता है।

 

* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार      !

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