बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव से कुछ लोग तीर्थयात्रा के लिए निकल पड़े। उस समय यात्रा करना आज की तरह आसान नहीं था। लोग लंबी दूरी पैदल तय करते थे, रास्ते में रुकते, विश्राम करते और फिर आगे बढ़ते। उसी समूह में एक पति-पत्नी भी थे। दोनों के मन में भगवान के दर्शन की गहरी श्रद्धा और उत्साह था।
कई दिनों की पैदल यात्रा के बाद वे लोग एक बड़ी नदी के किनारे पहुंचे। नदी पार किए बिना आगे का रास्ता नहीं था। किनारे पर एक छोटी-सी नाव खड़ी थी, जिसमें बैठकर यात्रियों को नदी पार करनी थी। सभी यात्री नाव में बैठ गए। नाव धीरे-धीरे नदी के बीच की ओर बढ़ने लगी।
अचानक मौसम बदल गया। देखते ही देखते आसमान पर काले बादल छा गए। तेज हवाएँ चलने लगीं और कुछ ही क्षणों में भयंकर तूफान आ गया। नदी की लहरें उफान मारने लगीं। छोटी-सी नाव डगमगाने लगी मानो कभी भी पलट सकती हो।
नाव में बैठे सभी लोग घबरा गए। कोई भगवान का नाम जपने लगा, कोई एक-दूसरे को पकड़कर खड़ा हो गया। औरतें डर के मारे अपने पतियों का हाथ कसकर पकड़ रही थीं। चारों ओर चीख-पुकार मच गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे अब जीवन का अंत निकट है।
लेकिन उस अफरा-तफरी के बीच एक आदमी बिल्कुल शांत खड़ा था। वह न घबराया, न किसी को पकड़कर खड़ा हुआ। उसके चेहरे पर अजीब-सी शांति थी। उसकी पत्नी भी यह देखकर हैरान थी कि जब सब लोग डर से कांप रहे हैं, तब उसका पति इतना निश्चिंत कैसे खड़ा है।
कुछ देर बाद तूफान धीरे-धीरे शांत हो गया और नाव सुरक्षित किनारे की ओर बढ़ने लगी। खतरा टल जाने पर उसकी पत्नी ने उससे पूछा,
“जब सब लोग इतने डर गए थे, तब आपको बिल्कुल भी डर नहीं लगा? आप इतने शांत कैसे रहे?”
उस आदमी ने बिना कुछ बोले नाव में पड़ी एक तलवार उठा ली और अपनी पत्नी की ओर इशारा करते हुए बोला, “अगर मैं अभी इस तलवार से तुम्हारा सिर काट दूं तो?”
यह सुनकर उसकी पत्नी हंस पड़ी और बोली, “आप कैसी बातें कर रहे हैं? आप ऐसा कभी नहीं कर सकते। मैं आपकी पत्नी हूं, आप मुझे नुकसान नहीं पहुंचा सकते।”
उस आदमी ने मुस्कुराते हुए कहा,
“जब तुम्हें मुझ पर इतना विश्वास है कि मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा, तो मुझे उस परमात्मा पर उससे भी ज्यादा विश्वास है। वही हमें इस संसार में लाया है, वही हमारी रक्षा करता है। जब तक उसकी इच्छा नहीं होगी, तब तक हमें कोई हानि नहीं पहुंचा सकता।”
उसकी बात सुनकर पत्नी की आंखों में श्रद्धा और समझ की चमक आ गई।
जब मन में अटूट विश्वास और आत्मविश्वास होता है, तब सबसे बड़ी विपत्ति भी हमें डिगा नहीं सकती। जीवन की हर परिस्थिति में परमात्मा पर भरोसा रखिए, क्योंकि सच्चा विश्वास ही मन को शांत और मजबूत बनाता है।
*राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
