लखनऊ:
प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में जन भवन प्रांगण, लखनऊ में दिनांक 06 फरवरी 2026 से आयोजित 57वीं प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी के तृतीय दिवस आज भी बड़ी संख्या में आमजन ने उत्साहपूर्वक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। अवकाश का दिन होने के कारण प्रातःकाल से ही प्रदर्शनी परिसर दर्शकों से भरा रहा।
प्रदर्शनी का समापन कल दिनांक 09 फरवरी 2026 को अपरान्ह 3ः00 बजे राज्यपाल जी द्वारा विभिन्न वर्गों की प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किए जाने के साथ किया जाएगा।
प्रदर्शनी में आगंतुकों को विभागीय विशेषज्ञों तथा विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों से पधारे कृषि वैज्ञानिकों द्वारा पालीहाउस में सब्जी उत्पादन, शहद उत्पादन, हाइड्रोपोनिक्स, मशरूम उत्पादन, छत एवं गमलों में सब्जी उत्पादन तथा हाईटेक नर्सरी के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीकों की विस्तृत एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसके साथ ही बागवानी फसलों से संबंधित उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक साहित्य का निःशुल्क वितरण भी किया गया।
इस भव्य प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न कारागारों द्वारा उत्पादित गुणवत्तापूर्ण शाकभाजियों के साथ-साथ गमलों में सुसज्जित विविध रंगों के मौसमी फूल पेंजी, पिटूनिया, सिनरेरिया, पालीएन्थस, रोडैन्थी, स्वीट विलियम, स्वीट एलाइजम, स्टाक, स्टेटिस, फ्लाक्स, वाल फ्लावर, कार्न फ्लावर, एस्टर, गेंदा, बोगनवेलिया, गुलाब एवं डहेलिया आदि का अत्यंत आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इसके अतिरिक्त कैक्टस, सकुलेन्ट्स, फलदार पौधे, शोभाकार पौधे एवं कलात्मक बोन्साई भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र रहे।
प्रदर्शनी में प्राकृतिक फूलों से निर्मित अद्भुत, सृजनात्मक एवं मनोहारी आकृतियों ने सभी का ध्यान आकृष्ट किया। इनमें वंदे मातरम् (150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में), बंकिम चंद्र चटर्जी एवं ‘आनंदमठ’ आधारित रचना, ऑपरेशन सिंदूर थीम, श्रीकृष्ण जी की बांसुरी, गोवर्धन पर्वत, भारत के संविधान की प्रतिकृति, नंदी एवं शिवलिंग, स्वामी विवेकानंद, राष्ट्रीय ध्वज, बिरसा मुंडा, रूफ टॉप गार्डनिंग, गुरुकुल पाठशाला, अहिल्याबाई होल्कर, समुद्री जीवों पर आधारित थीम, तितली, गरुड़, विवाह मंडप, सारस पक्षी युगल, सुदर्शन चक्र एवं शंख की प्रतिकृति तथा ‘जय जवान’ थीम के अंतर्गत सेना द्वारा रक्षा उपकरणों एवं ब्रह्मोस मिसाइल का प्रदर्शन सहित प्रदर्शित आकृतियां प्रमुख रूप से शामिल रहीं। ये सभी आकृतियाँ आगंतुकों के लिए लोकप्रिय सेल्फी प्वाइंट बनी रहीं।
प्रदर्शनी परिसर में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कृषकों, आगंतुकों, महिलाओं एवं किशोरियों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। शिविर में ईएनटी, सर्जरी, नेत्र रोग, अस्थि रोग, स्त्री रोग, दंत रोग, रक्त जांच, कैंसर स्क्रीनिंग तथा टी.बी. जांच की सुविधाएं उपलब्ध रहीं।
इसके साथ ही दर्शकों ने जन भवन स्थित पंचतंत्र वाटिका, नवग्रह, राशि, नक्षत्र वाटिका, मियावकी वन सहित विभिन्न कक्षों का भ्रमण कर इसके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी प्राप्त की।
उल्लेखनीय है कि यह प्रदर्शनी प्रदेश की सबसे बड़ी फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी है। आज लगभग 1.5 लाख से अधिक दर्शकों द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में जन भवन प्रांगण, लखनऊ में दिनांक 06 फरवरी 2026 से आयोजित 57वीं प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी के तृतीय दिवस आज भी बड़ी संख्या में आमजन ने उत्साहपूर्वक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। अवकाश का दिन होने के कारण प्रातःकाल से ही प्रदर्शनी परिसर दर्शकों से भरा रहा।प्रदर्शनी का समापन कल दिनांक 09 फरवरी 2026 को अपरान्ह 3ः00 बजे राज्यपाल जी द्वारा विभिन्न वर्गों की प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किए जाने के साथ किया जाएगा।
प्रदर्शनी में आगंतुकों को विभागीय विशेषज्ञों तथा विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों से पधारे कृषि वैज्ञानिकों द्वारा पालीहाउस में सब्जी उत्पादन, शहद उत्पादन, हाइड्रोपोनिक्स, मशरूम उत्पादन, छत एवं गमलों में सब्जी उत्पादन तथा हाईटेक नर्सरी के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीकों की विस्तृत एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसके साथ ही बागवानी फसलों से संबंधित उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक साहित्य का निःशुल्क वितरण भी किया गया।
इस भव्य प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न कारागारों द्वारा उत्पादित गुणवत्तापूर्ण शाकभाजियों के साथ-साथ गमलों में सुसज्जित विविध रंगों के मौसमी फूल पेंजी, पिटूनिया, सिनरेरिया, पालीएन्थस, रोडैन्थी, स्वीट विलियम, स्वीट एलाइजम, स्टाक, स्टेटिस, फ्लाक्स, वाल फ्लावर, कार्न फ्लावर, एस्टर, गेंदा, बोगनवेलिया, गुलाब एवं डहेलिया आदि का अत्यंत आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इसके अतिरिक्त कैक्टस, सकुलेन्ट्स, फलदार पौधे, शोभाकार पौधे एवं कलात्मक बोन्साई भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र रहे।
प्रदर्शनी में प्राकृतिक फूलों से निर्मित अद्भुत, सृजनात्मक एवं मनोहारी आकृतियों ने सभी का ध्यान आकृष्ट किया। इनमें वंदे मातरम् (150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में), बंकिम चंद्र चटर्जी एवं ‘आनंदमठ’ आधारित रचना, ऑपरेशन सिंदूर थीम, श्रीकृष्ण जी की बांसुरी, गोवर्धन पर्वत, भारत के संविधान की प्रतिकृति, नंदी एवं शिवलिंग, स्वामी विवेकानंद, राष्ट्रीय ध्वज, बिरसा मुंडा, रूफ टॉप गार्डनिंग, गुरुकुल पाठशाला, अहिल्याबाई होल्कर, समुद्री जीवों पर आधारित थीम, तितली, गरुड़, विवाह मंडप, सारस पक्षी युगल, सुदर्शन चक्र एवं शंख की प्रतिकृति तथा ‘जय जवान’ थीम के अंतर्गत सेना द्वारा रक्षा उपकरणों एवं ब्रह्मोस मिसाइल का प्रदर्शन सहित प्रदर्शित आकृतियां प्रमुख रूप से शामिल रहीं। ये सभी आकृतियाँ आगंतुकों के लिए लोकप्रिय सेल्फी प्वाइंट बनी रहीं।
प्रदर्शनी परिसर में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कृषकों, आगंतुकों, महिलाओं एवं किशोरियों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। शिविर में ईएनटी, सर्जरी, नेत्र रोग, अस्थि रोग, स्त्री रोग, दंत रोग, रक्त जांच, कैंसर स्क्रीनिंग तथा टी.बी. जांच की सुविधाएं उपलब्ध रहीं।
इसके साथ ही दर्शकों ने जन भवन स्थित पंचतंत्र वाटिका, नवग्रह, राशि, नक्षत्र वाटिका, मियावकी वन सहित विभिन्न कक्षों का भ्रमण कर इसके ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी प्राप्त की।
उल्लेखनीय है कि यह प्रदर्शनी प्रदेश की सबसे बड़ी फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी है। आज लगभग 1.5 लाख से अधिक दर्शकों द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
