भारत में बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा और समग्र विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया यह दिवस समाज में लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बालिकाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बन चुका है। राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026, महिला-नेतृत्व वाले विकास और ‘विकसित भारत@2047’ के विज़न के अनुरूप बालिकाओं की भूमिका को और अधिक सशक्त रूप में रेखांकित करता है।
पिछले एक दशक में सरकार की लक्षित नीतियों और योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के प्रभाव से जन्म के समय लिंगानुपात 2014–15 के 918 से बढ़कर 2023–24 में 930 हो गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। यूडीआईएसई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024–25 में माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात 80.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि देश के 97.5 प्रतिशत विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध है।
बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार द्वारा मिशन शक्ति को एकीकृत छत्र योजना के रूप में लागू किया गया है। केंद्रीय बजट 2025–26 में मिशन शक्ति के लिए 3,150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, नारी अदालत, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और सखी निवास जैसी योजनाएँ शामिल हैं, जो जीवन-चक्र आधारित सहायता प्रदान करती हैं। जनवरी 2026 तक देशभर में 2,153 बाल विवाह रोके गए हैं और 60,262 बाल विवाह निषेध अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी सरकार का विशेष फोकस रहा है। समग्र शिक्षा, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, उड़ान, विज्ञान ज्योति और नव्या जैसी योजनाएँ बालिकाओं को विद्यालय से लेकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तक निरंतर अवसर उपलब्ध करा रही हैं। STEM क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में भी भारत विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है, जहाँ महिलाओं की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है।
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में किशोरियों के लिए योजना, मासिक धर्म स्वच्छता योजना और पोषण अभियान के माध्यम से पोषण, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही सुकन्या समृद्धि योजना जैसी वित्तीय समावेशन पहलों ने बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके अंतर्गत नवंबर 2024 तक 4.2 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।
राष्ट्रीय बालिका दिवस 2026 यह संदेश देता है कि सरकार, समाज और समुदाय के साझा प्रयासों से भारत बालिकाओं के लिए एक सुरक्षित, समान और सशक्त भविष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है, जहाँ प्रत्येक बालिका अपनी पूर्ण क्षमता के साथ राष्ट्र निर्माण में भागीदार बन सके।
