उ0प्र0 राजकीय अभिलेखाकार लखनऊ में अभिलेखों के संरक्षण हेतु 05 दिवसीय पाण्डुलिपि कार्यशाला का कल शुभारम्भ किया गया

लखनऊ: माननीय मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ  की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति संवेदनशील नीति के अनुरुप मा० संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  जयवीर सिंह  के अभिलेखों के संरक्षण के लिए प्रतिवद्धता के क्रम में उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार लखनऊ में 19 से 23 जनवरी, 2026 तक 05 दिवसीय अभिलेख/पाण्डुलिपि अभिरुचि कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत कल 19 जनवरी, 2026 को कार्यशाला का शुभारम्भ, डा० राजमणि, सेवानिवृत्त सहायक निदेशक-अभिलेख, राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि डा० अमलेश कुमार मिश्र, निदेशक, हिस्ट्री डिवीजन रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा० राजमणि, सेवानिवृत्त सहायक निदेशक-अभिलेख, राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली द्वारा शोधार्थियों को इतिहास में शोध के नवीन आयाम एवं वर्तमान परिदृश्य विषय पर विस्तार से जानकारी दी गयी। उन्होंने अपने वक्तव्य में शोध के लिए प्राथमिक, द्वितीय एवं तृतीय श्रोतों का उपयोग करते हुए शोध ग्रंथ तैयार करने के लिए शोधार्थियों को जानकारियां दीं। हमें सोशल मीडिया इन्टरनेट से प्राप्त जानकारी की सत्यता परखने के बाद ही उसका उपयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आर्काइव्स में सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी रोजगार की संभावनायें हैं। आज देश के सभी राज्यों में लगभग अभिलेखागार हैं साथ ही साथ निजी क्षेत्र भी अपने आर्काइव्स खोलने में पीछे नहीं हैं। जैसे गोदरेज, टाटा, सी०ई०पी०टी०, विभिन्न बैंक, विश्वविद्यालय आदि।
अमित कुमार अग्निहोत्री, निदेशक अभिलेखागार ने अपने उद्बोधन में बताया कि यह कार्यशाला का द्वितीय चरण है। प्रथम चरण माह जून, 2025 में किया गया था। इस कार्यशाला में 700 से अधिक अभ्यर्थियों ने आनलाइन रजिस्ट्रेशन किया। उनमें से 200 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में पाण्डुलिपियों के लिए भारत सरकार द्वारा सर्वे कराया जाना है तथा प्राप्त पाण्डुलिपियों का डिजिटाइजेशन के उपरान्त पोर्टल पर अपलोड कर दिया जायेगा तथा आवश्यकतानुसार उनका संरक्षण भी किया जायेगा।
इस कार्यशाला में प्रतिभागियों द्वारा वक्ताओं से अनेक प्रश्न भी पूछे गये। विद्यार्थियों को वक्ताओं द्वारा समुचित उत्तर प्रदान किया गया, जो कि विद्यार्थियों के अत्यन्त ही उपयोगी रहा।

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