बोईरदादर, रायगढ परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने सतसंग में आए नए लोगों को नामदान दे कर वहीं पर कुछ देर तक उन्हें साधना का अभ्यास कराया और कहा कि सुबह का समय साधना के लिए बहुत अच्छा होता है। चौबीस घंटे में तीन-तीन घंटे के आठ प्रहर होते हैं; सूर्योदय से लेकर के दूसरे दिन के सूर्योदय तक। चार प्रहर दिन में होते हैं और चार प्रहर रात में होते हैं। इनका अलग-अलग नाम भी है और सुबह तीन बजे से छः बजे का प्रहर ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। यह मुहूर्त साधना करने के लिए बहुत अच्छा रहता है।
यह साधना कोई भी मनुष्य जिसको समरथ गुरु से नामदान मिला है, वह कर सकता है; चाहे गरीब हो या अमीर हो, चाहे पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ हो और चाहे किसी भी जाति-मजहब का हो।
सतसंग सुनने से आदमी हैवान से इंसान और साधना करके भगवान बन जाता है
सतसंग में आने से बिगड़े बच्चे भी सुधर जाते हैं। सतसंग सुनने से आदमी हैवान से इंसान बन जाता है और जब साधना करने लगता है तो इंसान से भगवान बन जाता है। नए लोगों को नामदान दिलाओ क्योंकि नामदान दिलाना बहुत बड़ा पुण्य का काम होता है।
अभी आगे जगह-जगह बहत्तर घंटे की अखण्ड नामध्वनि चलेगी
अभी आगे जगह-जगह बहत्तर घंटे की अखण्ड नामध्वनि चलेगी। यह अखण्ड नामध्वनि जहां नामदानी कम हैं वहां भी चल सकती है। इसमें रिश्तेदार, पड़ोसी सब बैठ सकते हैं। यह कब से कब लगेगी इसकी खबर आपको लग जाएगी।
