हैदरगढ़ बाराबंकी। नगर पंचायत हैदरगढ़ रामलीला कोठी के सामने हनुमान जी महाराज के मंदिर में राम कथा के अंतिम दिन व्यास पंडित रामानुजाचार्य मिश्र ने बताया कि भगवान श्री राम की कृपा के बिना आपको कोई भी ( वस्तु ) सत्संग सहजता से प्राप्त नहीं हो सकता। तुलसीदास जी द्वारा रामचरितमानस में यह प्रसंग आता है की अच्छी संगत के बिना विवेक (सही गलत की समझ) नहीं होती। आपको ज्ञात होना चाहिए कि सत्संग एक ऐसा प्रयोजन है जो राम की कृपा से ही मिल सकता है जिससे व्यक्ति का कल्याण हो जाता है जीव बंधनों से मुक्त होकर भवसागर से पार हो जाता है। इस लोक और परलोक में परमात्मा के सानिध्य से सारे सुखों को भोगते हुए मोक्ष को प्राप्त हो जाता है। पंडित व्यास रामानुजाचार्य मिश्र ने संगीतमयी राम कथा के अंतिम दिन हनुमान जी तथा विभीषण जी का मिलन सीता जी को राक्षसियो द्वारा त्रास देना त्रिजटा को सपने में जो दिखा उसका वर्णन तथा अशोक वाटिका में सीता जी हनुमान जी वार्ता सहित लंका दहन लक्ष्मण शक्ति मेघनाथ वध कुंभकरण वध रावण के कुल तारण जैसी संपूर्ण कथा का बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णन किया।
उपरोक्त कथा में विदुषी अंशिका मिश्रा सुभाष चंद्र यादव ढोलक वादक सुनील साहू पैड वादक अवधेश कुमार हारमोनियम वादक विवेकानंद शास्त्री ने कथा को संगीत के धुनो में पिरो दिया।
आपको बता दे की कथा इतनी सुंदर मार्मिक थी जो मन को भाव विभोर कर रही थी श्रोताओं को इतना आनंद आया कि सभी श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए।
राम कथा सुंदर करतारी” संसय विहग उड़ावन हारी”!!
