चित्रकूट मंडल का मंडलीय सम्मेलन हमीरपुर में संपन्न हुआ

लखनऊ राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के आंदोलन के तीसरे चरण में मंडलीय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। आगरा ,गोरखपुर, अयोध्या मंडल के बाद आज चित्रकूट मंडल का सम्मेलन हमीरपुर के लोक निर्माण विभाग के परिसर में रघुबीर प्रजापति की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मेलन में चित्रकूट, बांदा ,महोबा एवं हमीरपुर के सभी विभागों के कर्मचारी एवं आशा बहुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। मंडलीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष जे एन तिवारी ने लखनऊ में बताया कि चित्रकूट मंडल में संयुक्त परिषद को मजबूती प्रदान करने के लिए हमीरपुर के लोक निर्माण विभाग में कार्यरत अतुल सिंह को मंडल का अध्यक्ष मनोनीत करते हुए मंडल के सभी जनपद शाखाओं का गठन करने की जिम्मेदारी दिया। जे एन तिवारी ने अवगत कराया कि कर्मचारियों की मांगों पर सरकार के आला अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। मुख्य सचिव एवं अन्य उच्च अधिकारियों के स्तर पर कर्मचारी संगठनों की वार्ताएं नहीं हो रही हैं, जिसके कारण आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय का लाभ नहीं मिल रहा है। संविदा कर्मचारियों का शोषण भी चरम पर है।
समाज कल्याण विभाग के संविदा शिक्षकों से बंधुआ मजदूर की तरह 12 घंटे की ड्यूटी ली जा रही है। खाद्य रसद विभाग के कर्मचारी भी 12 घंटे से अधिक ड्यूटी कर रहे हैं। कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों पर मुख्य सचिव समिति निर्णय नहीं कर रही है ।पुरानी पेंशन बहाली पर भी सरकार चुप्पी साधे हुए हैं। आशा बहुओं को न्यूनतम 18000 मानदेय देने का मामला भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। विगत तीन वर्षों से आशा बहुओं के मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है। विभिन्न विभागों में रिक्त पद पड़े हुए हैं जिसके कारण वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों पर कार्य का दबाव अधिक हो गया है। SIR ड्यूटी में लगाए गए BLO के ऊपर काम का अत्यधिक बोझ है जिसके कारण कई BLO आत्महत्या कर चुके है। कार्य के दौरान आत्महत्या कर चुके सभी बूथ लेवल अधिकारियों के लिए संयुक्त परिषद ने 10 लाख रुपए अनुग्रह राशि की मांग किया है।
संयुक्त परिषद ने सरकार का ध्यान कर्मचारियों की मांगों की तरफ बार-बार आकर्षित किया है लेकिन सरकार उपेक्षात्मक रवैया अपनाए हुए हैं। यद्यपि मुख्यमंत्री जी ने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए निगम का गठन करने का आदेश जारी कर दिया है लेकिन प्रशासनिक अधिकारी निगम को धरातल पर नहीं आने दे रहे हैं ।कर्मचारियों की मांगों पर लगातार उपेक्षा के कारण राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद 4 सितंबर से आंदोलन कर रही है आंदोलन का तीसरा चरण 7 जनवरी को समाप्त होगा। उसके बाद 20 जनवरी को विधानसभा पर विशाल धरना प्रदर्शन एवं घेराव का कार्यक्रम है, जिसमें प्रदेश के सभी विभागों के 50000 से अधिक कर्मचारी प्रतिभाग करेंगे ।धरना प्रदर्शन में प्रदेश में कार्यरत 2 लाख से अधिक आशाएं भी अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग करने के लिए पूरी तैयारी कर रही हैं।
जे एन तिवारी ने कहा कि यदि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर इसी प्रकार उपेक्षा करती रही तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद 2027 के चुनाव में मैदान में होगी जिसका असर चुनाव पर पड़ेगा। सम्मेलन को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की प्रदेश महामंत्री अरुणा शुक्ला ने भी संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दुहाई देने वाली सरकार में सबसे अधिक उत्पीड़न महिलाओं का ही हो रहा है।

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