” दिवाली “

जल रे , दीपक जल तू

जिनके आगे अँधियारा है ,

उनके लिए उजल तू !

जोता, बोया, लुना जिन्होंने

श्रम कर ओटा धुना जिन्होंने

बत्ती बांटकर तुझे संजोया,

उनके तप का फल तू ,

जल रे , दीपक जल तू !

चूल्हा छोड़ जलाया तुझको ,

क्या न दिया, जो पाया, तुझको ,

भूल न जाना कभी ओट का ,

वह पुनीत अंचल तू ,

जल रे, दीपक , जल तू !!

कुछ न रहेगी, बात रहेगी ,

होगा प्रात, न रात रहेगी ,

सब जागें तब सोना सुख से

तात, न हो चंचल तू ,

जल रे , दीपक जल तू !

( संकलित )

— राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *