मुख्यमंत्री ने गोमती तट की स्वच्छता के सम्बन्ध में टेरिटोरियल आर्मी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की

मुख्यमंत्री ने गोमती तट की स्वच्छता के सम्बन्ध में
टेरिटोरियल आर्मी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की

मुख्यमंत्री ने ‘स्वच्छ, अविरल और निर्मल गोमती’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘गोमती नदी पुनर्जीवन मिशन’ की घोषणा की

पीलीभीत से गाजीपुर तक प्रवाहित गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी
सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और जीवनधारा की प्रतीक : मुख्यमंत्री

मिशन का दायरा पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती नदी
के सम्पूर्ण प्रवाह क्षेत्र को कवर करेगा, जिससे गोमती अपने पूरे
विस्तार में स्वच्छ, अविरल और निर्मल रूप पुनः प्राप्त कर सके

गोमती का पुनर्जीवन केवल जल शुद्धिकरण का नहीं, बल्कि
हमारी संस्कृति और पर्यावरण के पुनर्संवर्धन का व्यापक अभियान

यह केवल एक प्रशासनिक परियोजना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग
की सहभागिता से चलने वाली एक जन-आंदोलनात्मक पहल होगी

नदी किनारे बसीं अवैध बस्तियों में घुसपैठियों की पहचान कर विधिसम्मत कार्यवाही
की जाए, ताकि गोमती के तटों पर स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके

टास्क फोर्स की मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं,
त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए और
प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता व जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए

गोमती पुनर्जीवन मिशन के लिए आवश्यक संसाधनों जैसे ट्रैक बोट,
फ्लोटिंग बैरियर, एक्सकेवेटर और अन्य उपकरण की उपलब्धता
में प्रदेश सरकार किसी प्रकार की कमी नहीं होने देगी

लखनऊ : 12 अक्टूबर, 2025

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने ‘स्वच्छ, अविरल और निर्मल गोमती’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘गोमती नदी पुनर्जीवन मिशन’ की घोषणा की है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पीलीभीत से गाजीपुर तक प्रवाहित गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और जीवनधारा की प्रतीक है। गोमती का पुनर्जीवन केवल जल शुद्धिकरण का नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण के पुनर्संवर्धन का व्यापक अभियान है। यह मिशन पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी साझा प्रतिज्ञा का प्रतीक बनेगा।
मुख्यमंत्री जी आज यहां अपने सरकारी आवास पर गोमती तट की स्वच्छता के सम्बन्ध में टेरिटोरियल आर्मी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री जी ने मिशन की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक परियोजना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता से चलने वाली एक जन-आंदोलनात्मक पहल होगी। गोमती में एक बूंद सीवरेज न गिरे, इसके लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नदी किनारे बसीं अवैध बस्तियों में घुसपैठियों की पहचान कर विधिसम्मत कार्यवाही की जाए, ताकि गोमती के तटों पर स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मिशन का दायरा पीलीभीत से गाजीपुर तक गोमती नदी के सम्पूर्ण प्रवाह क्षेत्र को कवर करेगा, जिससे गोमती अपने पूरे विस्तार में स्वच्छ, अविरल और निर्मल रूप पुनः प्राप्त कर सके।
मुख्यमंत्री जी ने मिशन के अन्तर्गत नगरीय सीवेज का 95 प्रतिशत से अधिक अवरोधन, नदी प्रदूषण को न्यूनतम स्तर तक लाना और नदी तटीय पारिस्थितिकी के पुनरुद्धार का लक्ष्य निर्धारित किया। बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि गोमती में गिरने वाले 39 प्रमुख नालों में से 13 अब भी बिना उपचारित हैं। वर्तमान में 06 एस0टी0पी0 605 एम0एल0डी0 की कुल क्षमता के साथ संचालित हैं। इन्हें पूर्ण रूप से प्रभावी बनाने हेतु नालों को एस0टी0पी0 तक मोड़ने, नए संयंत्र स्थापित करने और पुराने संयंत्रों के उन्नयन की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह मिशन केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नदी के जैविक, सांस्कृतिक और सौंदर्यात्मक पुनर्जीवन का माध्यम बनेगा। कार्ययोजना के अन्तर्गत लखनऊ में इकाना वेटलैंड और साजन झील जैसे नए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे। नदी किनारे के अवैध अतिक्रमणों को हटाने, घाटों के सौंदर्यीकरण, और तटीय हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर सख्ती से प्रतिबन्ध लागू किया जाएगा, क्योंकि सीवर सिस्टम को चोक करने और प्रदूषण बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अन्तर्गत इसी वर्ष जनवरी में गठित गोमती टास्क फोर्स में राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, लखनऊ नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण तथा अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया गया है। इनमें बी0बी0ए0यू0 लखनऊ के प्रो0 (डॉ0) वेंकटेश दत्ता और अतुल्य गंगा ट्रस्ट के सह-संस्थापक ले0 कर्नल देवेन्द्र चौधरी (सेवानिवृत्त) प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं। यह टास्क फोर्स शासन और समाज के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य कर रही है।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि गोमती टास्क फोर्स द्वारा अब तक नदी तटों पर पैदल और नौका गश्त, एक हजार टन से अधिक जलकुम्भी की सफाई, नालों का सर्वेक्षण कर प्रदूषण स्रोतों की पहचान, तथा 100 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से 70,000 से ज्यादा नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। ‘नदी योग अभियान’ के अंतर्गत 21 अप्रैल से 21 जून 2025 तक पाँच प्रमुख घाटों पर प्रतिदिन योग, घाट-सफाई और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें 50,000 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया और 300 टन से अधिक जलकुम्भी हटाई गई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोमती का जल जीवन का आधार है, और इसे स्वच्छ, अविरल तथा निर्मल बनाए रखना उत्तर प्रदेश की नैतिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। टास्क फोर्स की मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए और प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता व जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोमती पुनर्जीवन मिशन के लिए आवश्यक संसाधनों जैसे ट्रैक बोट, फ्लोटिंग बैरियर, एक्सकेवेटर और अन्य उपकरण की उपलब्धता में सरकार किसी प्रकार की कमी नहीं होने देगी। यह मिशन केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता की सहभागिता से संचालित एक संकल्प यात्रा बनेगा। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में शैक्षणिक व अन्य सामाजिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि यह मिशन एक जनांदोलन का स्वरूप ग्रहण कर सके। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब समाज और शासन साथ कदम बढ़ाएँगे, तभी गोमती अपनी स्वाभाविक निर्मलता और जीवनदायिनी धारा पुनः प्राप्त कर सकेगी।
इस अवसर पर मेजर जनरल सलिल सेठ, ब्रिगेडियर नवतेज सिंह सोहल, ब्रिगेडियर सी0 माधवाल, कर्नल अरविन्द एस. प्रसाद, ले0 कर्नल सचिन राणा, ले0 कर्नल सौरभ मेहरोत्रा, मेजर के0एस0 नेगी, प्रो0 (डॉ0) वेंकटेश दत्ता, ले0 कर्नल हेम लोहुमी, एस0एम0 (सेवानिवृत्त) सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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