बंदरों का आतंक ,मकान की रेलिंग गिरायी,10 साल का बालक दबा, लोगों ने बाहर निकाला,आक्रोश

बंदरों का आतंक ,मकान की रेलिंग गिरायी,10 साल का बालक दबा, लोगों ने बाहर निकाला,आक्रोश

मऊ

मधुबन। स्थानीय तहसील क्षेत्र के दरगाह में शुक्रवार की सुबह बंदरों ने एक मकान की रेलिंग गिरा दी। मलबे में एक 10 साल का बालक दब गया। स्थानीय लोगों ने मदद कर उसे मलबे से बाहर निकाला। उसे गंभीर चोटें आयी हैं। घटना को लेकर गाँव के लोगों में भारी आक्रोश है।
हादसा सुबह लगभग 6.30 बजे हुआ। बंदरों के कूदने से नियाज कुरैशी के मकान के बगल स्थित उनके भाई के मकान की पूरी रेलिंग उनके मकान पर आ गिरी। घर में रखे समान क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत यह रही की हादसे के समय घर के अधिकतर सदस्य घर के बाहर थे। घर के एक कमरे में सो रहा बालक मलबे में दब गया। उसे गंभीर चोटें आयीं। सूचना पर मौके पर पहुंचे लेखपाल द्वारा नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तहसील प्रशासन को दे दी है। मगर इस घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
गाँव के लोगो का कहना है कि इस गाँव के लोग बीते 4 सालों से बंदरों के आतंक से दहशत में जी रहे हैं। बंदरों की संख्या 250-300 के आसपास है। आये दिन यह बंदर लोगों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब तो यह बन्दर आक्रामक भी हो गए हैं। किसी पर भी हमला कर दे रहे हैं। हमले में अब तक गाँव के एक दर्जन से अधिक लोग चोटिल हो चुके हैं। इनके भय से गाँव के लोगों ने खुद अपने घर की छतों पर जाना छोड़ दिया है। आये दिन लोगों का नुकसान हो रहा है मगर प्रशासन कोई मदद नहीं कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में उनके द्वारा सभी सक्षम अधिकारियों तक मदद की गुहार लगाई जा चुकी है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गयी मगर नतीजा कुछ नहीं निकला। घटना को लेकर गाँव के लोगों में भारी आक्रोश है। गाँव के सुजीत मद्देशिया, मंटू यादव, मुकेश गुप्त, मोहसिन आलम, मौलाना महबूब, धर्मेंद्र यादव, कौशल राजभर आदि का कहना था कि ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है। किसी की मौत हो और फिर प्रशासन की नींद खुले। आज की घटना एक बड़ी चेतावनी है। ग्रामीणों की मांग है कि पीड़ित परिवार अत्यंत गरीब है। उसके नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाये। प्रशासन द्वारा अभियान चला कर इस गाँव से उत्पाति बंदरों को भगाया जाये ताकि गाँव के लोग चैन की ज़िन्दगी जी सकें।

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