“.करवा चौथ “

कभी मूरत कभी सूरत से हमको प्यार होता है ,

इबादत में मुहब्बत का ही इक विस्तार होता है !

हम करवा चौथ के व्रत को मुकम्मल मान लेते हैं ,

ज़मीं के चाँद को जब चाँद का दीदार होता है !

पुजारिन बन के पतियों की उमर की कामना करतीं,

सुहागिन औरतों का आत्मा का प्यार होता है !

तुम्हें ऐ चाँद हिंदू देख ले तो चौथ होता है ,

मुसलमा देख ले तो ईद का त्योहार होता है !

यही वो चाँद है बच्चे जिसे मामा कहा करते ,

हकीकत में मगर रिश्तों का भी आधार होता है !

( संकलित )

— राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !

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