फिर क्यों रहूँ दर– दर खड़ा
जब आज मेरे सामने
है रास्ता इतना पड़ा
जब तक न मंज़िल पा सकूँ ,
तब तक न मुझे विराम है ,
चलना हमारा काम है !
कुछ कह लिया , कुछ सुन लिया
कुछ बोझ अपना बंट गया
अच्छा हुआ तुम मिल गए
कुछ रास्ता ही कट गया ,
क्या राह में परिचय कहूँ ,
राही हमारा नाम है ,
चलना हमारा काम है ! !
—– प्रसिद्ध कवि शिवमंगल सिंह सुमन
( संकलित )
—- राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

