चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूंथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी— माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नहीं, सम्राटों के शव, पर, हे…
View More ” पुष्प की अभिलाषा “चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूंथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी— माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नहीं, सम्राटों के शव, पर, हे…
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