” दूसरे के मन का कूड़ा अपने मन में मत भरिये “

एक दिन एक व्यक्ति रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो में बैठा। सुबह का समय था। सड़क पर अधिक भीड़ नहीं थी। ऑटो चालक बहुत…

View More ” दूसरे के मन का कूड़ा अपने मन में मत भरिये “

” चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया “

चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया , वो गैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया ! हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी गायब…

View More ” चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया “

“ज़मी छोड़कर मैं किधर जाऊँगा “

ज़मी छोड़कर मैं किधर जाऊँगा अंधेरों के अन्दर उतर जाऊँगा !   गिरी पत्तियाँ सारी सुखी हुई नये मौसमों में बिखर जाऊँगा !   अगर…

View More “ज़मी छोड़कर मैं किधर जाऊँगा “