” दूसरे के मन का कूड़ा अपने मन में मत भरिये “

एक दिन एक व्यक्ति रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो में बैठा। सुबह का समय था। सड़क पर अधिक भीड़ नहीं थी। ऑटो चालक बहुत शांति और सावधानी से अपना ऑटो चला रहा था। तभी अचानक एक कार पार्किंग से तेजी से सड़क पर आ गई। ऑटो चालक ने तुरंत ब्रेक लगाया। कार और ऑटो की टक्कर होते-होते बच गई।

लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि गलती कार चालक की होने के बावजूद वह ऑटो वाले पर ही चिल्लाने लगा। उसे भला-बुरा कहने लगा और तरह-तरह की बातें सुनाने लगा।

ऑटो चालक ने उसकी सारी बातें चुपचाप सुनीं, मुस्कराया और बिना विवाद किए आगे बढ़ गया।

ऑटो में बैठे यात्री से रहा नहीं गया। उसने पूछा, “भाई! गलती उस कार वाले की थी, फिर भी तुमने उसे कुछ नहीं कहा? उसने तुम्हारा अपमान किया और तुम चुपचाप चले आए।”

ऑटो चालक मुस्कराते हुए बोला, “साहब! क्या आपने कभी कूड़े से भरा ट्रक देखा है? कुछ लोग भी ऐसे ही होते हैं। उनके मन में क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, निराशा और चिंता का इतना कूड़ा भरा होता है कि वे हर समय उसे दूसरों पर फेंकने का अवसर तलाशते रहते हैं।”

यात्री ने उत्सुकता से पूछा, “तो ऐसे लोगों के साथ क्या करना चाहिए?”

ऑटो चालक ने बड़े धैर्य से उत्तर दिया, “साहब! यदि कोई व्यक्ति अपने मन का कूड़ा हमारे ऊपर फेंकता है और हम भी क्रोध करके उसे स्वीकार कर लेते हैं, तो हमारे भीतर भी वही कूड़ा जमा होने लगता है। फिर हम भी दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। इसलिए मैं ऐसे लोगों के कूड़े को अपने मन में जगह नहीं देता। मैं मुस्कराकर आगे बढ़ जाता हूँ। आखिर अपनी मानसिक शांति से बढ़कर कुछ भी नहीं है।”

उसकी बातें सुनकर यात्री कुछ देर तक मौन रहा। उसे महसूस हुआ कि एक साधारण ऑटो चालक ने आज उसे जीवन का बहुत बड़ा पाठ पढ़ा दिया है।

उस दिन उसने निश्चय किया कि अब वह हर किसी की बात को अपने दिल पर नहीं लेगा और न ही दूसरों के क्रोध को अपने व्यवहार का हिस्सा बनने देगा।

🌿 जीवन की तीन अनमोल सीख 🌿

1. हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं है।

कभी-कभी मौन रहना सबसे अच्छा उत्तर होता है। हर विवाद में जीतना आवश्यक नहीं, क्योंकि कई बार विवाद से दूर रहना ही सबसे बड़ी जीत होती है। अपनी ऊर्जा उन कार्यों में लगाइए जो आपके जीवन को बेहतर बनाते हैं।

2. इंसान वही बाँटता है जो उसके भीतर होता है।

जिसके मन में प्रेम होता है, वह प्रेम बाँटता है। जिसके मन में ज्ञान होता है, वह ज्ञान बाँटता है। जो स्वयं दुखी होता है, वह दूसरों को भी दुखी करने का प्रयास करता है। इसलिए किसी के कटु व्यवहार को अपनी पहचान मत बनने दीजिए।

3. अपने मन को अच्छे विचारों से भरकर रखिए।

जिस प्रकार खेत में अच्छे बीज नहीं बोए जाएँ तो वहाँ अपने आप घास-फूस उग जाती है, उसी प्रकार मन को सकारात्मक विचारों से नहीं भरा जाए तो नकारात्मक विचार अपना स्थान बना लेते हैं। इसलिए प्रतिदिन अच्छे विचार पढ़िए, अच्छी संगति रखिए और अपने भीतर प्रेम, धैर्य तथा विश्वास को बढ़ाइए।

 

जीवन बहुत छोटा और सुंदर है। इसे दूसरों की ईर्ष्या, नफरत और कटु शब्दों में उलझकर व्यर्थ मत कीजिए।

जो आपका सम्मान करे, उसका हृदय से धन्यवाद कीजिए। जो आपका अपमान करे, उसे क्षमा करके आगे बढ़ जाइए। याद रखिए, हर व्यक्ति का व्यवहार उसकी अपनी सोच और संस्कारों का परिचय देता है, आपकी योग्यता का नहीं।

दूसरों के मन का कूड़ा अपने मन में मत भरिए, क्योंकि आपका मन कोई कूड़ेदान नहीं, बल्कि प्रेम, शांति और खुशियों का मंदिर है।
सदा प्रसन्न रहिए, सकारात्मक सोचिए और दूसरों के जीवन में भी खुशियाँ बाँटिए।

 

* राम कुमार दीक्षित  , पत्रकार   !

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