एक बार की बात है, आसमान में एक चील बड़े मजे से उड़ रही थी। उसने अपने मुंह में एक शिकार यानी एक चूहा दबा रखा था। लेकिन उसकी यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी। कुछ ही पलों में आसमान में शोर गूंज उठा और लगभग पच्चीस-तीस अन्य चीलों ने उसे घेर लिया। वे सभी उस अकेली चील पर झपट्टा मार रही थीं, उसे चोंच मार रही थीं और उसे लहूलुहान करने पर आमादा थीं। ऐसा लग रहा था जैसे वे सब उस चील की कट्टर दुश्मन बन चुकी हैं।
इस भयानक छीना-झपटी और जीवन-मरण के संघर्ष के बीच, पहली चील के मुंह से वह चूहा छूट गया और नीचे गिर गया।
जैसे ही चूहा मुंह से छूटा, एक जादुई बदलाव हुआ। जो चीलें पल भर पहले पहली चील की जान लेने पर तुली थीं, उन्होंने तुरंत उसे छोड़ दिया। अब किसी को भी उस पहली चील में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वे सारी की सारी चीलें उस गिरते हुए चूहे की तरफ लपक पड़ीं।
अब पहली चील आसमान में बिल्कुल अकेली, शांत और सुरक्षित उड़ रही थी। उसके शरीर पर घाव थे, लेकिन उसका मन बिल्कुल साफ हो चुका था। उसने एक गहरी सांस ली और सोचने लगी—”वाह! इनमें से कोई भी वास्तव में मेरी दुश्मन नहीं थी। सब मुझसे नफरत नहीं कर रही थीं। लड़ाई तो सिर्फ उस चूहे के लिए थी, जिसे मैंने पकड़ रखा था और जिसे वे भी पाना चाहती थीं। चूहा छूटा, और दुश्मनी खत्म हो गयी।”
यह छोटी सी कहानी हमारे समाज का एक बहुत बड़ा सच बयां करती है। अक्सर जब हम जीवन में सफल होते हैं, कोई बड़ा पद हासिल करते हैं, या धन-दौलत कमाते हैं, तो हमारे आस-पास के लोग हमसे जलने लगते हैं। हमें लगता है कि पूरी दुनिया हमारी दुश्मन बन गई है।
> *याद रखें:* लोग आपसे नफरत नहीं करते, बल्कि वे उस ‘सफलता के चूहे’ से ईर्ष्या करते हैं जो आपके पास है और उनके पास नहीं है।
यदि आज आपके कई दुश्मन हैं, तो इस गुमान या घमंड में मत रहिए कि आप बहुत महान या खास हैं इसलिए लोग आपके पीछे पड़े हैं। सच्चाई बस इतनी है कि आपने अपने मुंह में सफलता, पद या प्रतिष्ठा का कोई ‘चूहा’ दबा रखा है। संसार में तरक्की के साधन, अवसर और सफलताएं (चूहे) सीमित हैं, लेकिन उन्हें पाने की चाह रखने वाले लोग (चीलें) बहुत ज्यादा हैं।
लड़ाई कभी भी आपसे व्यक्तिगत नहीं होती, लड़ाई हमेशा उस ‘चूहे’ को पाने की होती है। इसलिए ईर्ष्या और विरोध को दिल से लगाने के बजाय, शांत रहकर अपनी उड़ान का आनंद लीजिए।
- राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
