” ईमानदारी की कमाई “

एक छोटे से गाँव नयासर में रामसेवक नाम का दूधवाला रहता था। उसके पास चार गायें थीं और उन्हीं के दूध को बेचकर वह अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। हर सुबह वह ताज़ा दूध लेकर नाव से नदी पार करता और शहर जाकर लोगों को दूध बेचता। शुरुआत में वह बहुत ईमानदारी से काम करता था, इसलिए लोग उस पर भरोसा करते थे। धीरे-धीरे उसके ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी और उसकी कमाई भी अच्छी होने लगी।

लेकिन कुछ समय बाद रामसेवक के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, “अगर मैं दूध में थोड़ा पानी मिला दूँ, तो ज्यादा मुनाफा होगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा।” बस फिर क्या था, वह रोज़ नदी पार करते समय दूध में नदी का पानी मिलाने लगा। लोग उसके व्यवहार पर भरोसा करते थे, इसलिए किसी ने उस पर शक नहीं किया। रामसेवक की आमदनी बढ़ने लगी और वह खुद को बहुत चतुर समझने लगा।

समय बीतता गया। कुछ ही महीनों में उसने काफी पैसा जोड़ लिया। उसी दौरान उसके बेटे की शादी तय हो गई। रामसेवक बहुत खुश था। वह शहर गया और बेटे की शादी के लिए महंगे कपड़े, सोने-चाँदी के गहने, बर्तन और कई कीमती सामान खरीद लाया। खरीदारी करते-करते शाम हो गई थी। वह जल्दी-जल्दी सामान नाव में रखकर गाँव लौटने लगा।

नाव में सामान बहुत ज्यादा था। नदी के बीच पहुँचते ही नाव डगमगाने लगी। रामसेवक घबरा गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। नाव अचानक पलट गई। उसने किसी तरह तैरकर अपनी जान तो बचा ली, लेकिन सारा सामान नदी की तेज धारा में बह गया। उसकी वर्षों की जमा पूँजी देखते ही देखते पानी में समा गई।

रामसेवक नदी किनारे बैठकर जोर-जोर से रोने लगा। वह बार-बार भगवान को दोष दे रहा था। तभी उसके मन में जैसे कोई आवाज़ गूँजी—
“जिस धन में बेईमानी मिली हो, वह टिकता नहीं। तुमने दूध में पानी मिलाकर लोगों को धोखा दिया था। आज वही पानी तुम्हारी कमाई बहाकर ले गया।”

यह बात रामसेवक के दिल को छू गई। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने उसी दिन प्रण लिया कि अब वह कभी किसी के साथ बेईमानी नहीं करेगा। अगले दिन से उसने शुद्ध दूध बेचना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा फिर लौट आया। अब उसकी कमाई भले थोड़ी कम थी, लेकिन मन में सुकून था। उसने समझ लिया था कि ईमानदारी से कमाया गया धन ही सच्चा सुख देता है।

 

ईमानदारी जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। बेईमानी से कमाया हुआ धन कुछ समय के लिए सुख दे सकता है, लेकिन अंत में वह दुख और पछतावा ही देता है। सच्ची सफलता वही है, जिसमें मेहनत, सच्चाई और विश्वास शामिल हो।

 

* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *