एसआईआरडी मे विभिन्न विषयो पर विशेषज्ञो द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण

उप मुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व व निर्देशन में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान बख्शी का तालाब, लखनऊ में विभिन्न सरकारी, अर्धसरकारी विभाग/संस्थाओ के अधिकारियों व कर्मचारियों व विभाग व रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें और अधिक दक्ष व सक्षम बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ द्वारा संस्थान के महानिदेशक एल० वेंकटेश्वर लू व प्र0 अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के प्रशासनिक नियन्त्रण में संस्थान प्रांगण के अन्तर्गत विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ द्वारा संस्थान के अन्तर्गत आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमो के तहत 10 से 15 नवंबर, तक केन्द्रीय सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंध संस्थान, नई दिल्ली द्वारा स्नातक परीक्षा-2024 के माध्यम से चयनित हुए 279 भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में नियुक्त अधिकारियों को संस्थान प्रथम चरण में 74 अधिकारियों को जनपद लखनऊ की तहसील, विकास खण्ड, कोतवाली, ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित शासकीय संस्थाओं-प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों, आंगनवाड़ी केन्द्रों, ग्राम पंचायत भवनों, गौशालाओं तथा अमृत सरोवरों के व्यवहारिक अध्ययन व आकलन हेतु, ‘विलेज अटैचमेंट’ विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। 10 से 12 नवंबर तक प्राथमिक विद्यालयों के कुल 100 अध्यापकों हेतु, ‘लर्निंग बाई डूइंग’ विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 10 से 14 नवंबर तक जनपद स्तरीय कुल 30 अधिकारियों हेतु, ‘जलवायु परिवर्तन-जलवायु जनित आपदाओं के अनुकूलन पर क्षमता संवर्धन’ विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन, संस्थान के महानिदेशक एल० वेंकटेश्वर लू के संरक्षण व अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के प्रशासनिक नियंत्रण में किया जा रहा है।
संस्थान के महानिदेशक एल० वेंकटेश्वर लू की अध्यक्षता में, मिशन कर्मयोगी एवं शासकीय सेवाओं में नैतिक व मानवीय गुणों के परिप्रेक्ष्य में, विशिष्ट अतिथि वार्ताकारों यथा-डा० किशन वीर सिंह शाक्य, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पूर्व वरिष्ठ सदस्य लोक सेवा आयोग उ०प्र०, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ रंजीत रंजन तथा यूनिसेफ, लखनऊ के विद्वान कार्यक्रम अधिकारी (आपदा) की गरिमामयी उपस्थिति में प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सम्बन्धित विषयगत वार्ताकारों द्वारा अपने-अपने विषयानुक्रम बिन्दुओं पर प्रासंगिक एवं उपयोगी व्याख्यान दिए गए।
डा० किशन वीर सिंह शाक्य द्वारा प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि शिक्षा की परिभाषा क्या है? अवधारणा, उद्देश्य एवं उपयोगिता। प्रत्येक नागरिक को आदर्श कार्यों व नैतिक गुणों को आत्मसात करने के सद्मार्ग पर चलने का हर सम्भव प्रयास करना चाहिए। भारत को विश्व गुरु बनने के सन्दर्भ में विभिन्न सूत्रों को बिन्दुवार परिभाषित किया। भारतीय संस्कृति व परिवेश को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अपनी मौलिकता की वास्तविकता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। मानव जीवन में खुशी और सफलताओं को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है-सेन्स आफ ओबेडियन्स, सेन्स आफ पेसेन्स और सेन्स आफ इनोवेशन। सदैव प्रत्येक मनुष्य को ध्यान रखना चाहिए कि उससे कोई ऐसा कार्य न हो, जिससे कि किसी की आत्मा आहत हो। कार्यक्रम के दौरान आपदा विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और इसके समाधान के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
अध्यक्षीय उद्बोधन के अन्तर्गत महानिदेशक संस्थान एल० वेंकटेश्वर लू द्वारा प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि आप सब जहां पर भी हैं या जिस पद पर हैं उसको निष्ठा, लगन, मेहनत व ईमानदारी पूर्वक निभायें। कोई भी पद जनहित की दृष्टि से छोटा या बड़ा नही होता है। बड़े पदों पर रहते हुए कतिपय अधिकारियों द्वारा प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर पाते हैं, परन्तु कभी-कभी छोटे पदों पर, कार्य करने वाले कर्मचारी जनहित में अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेते हैं। हम सभी अधिकतर ग्रामीण अंचल से ही सम्बन्धित है। आम ग्रामीण का बहुधा कार्य विकास खण्ड, तहसील, पुलिस थाने तथा विद्युत विभाग से पड़ता है, जहां के कर्मचारी/अधिकारी ग्रामीण अंचल के ही होते हैं। ऐसी दशा में अपने ही भाई-बन्धुओं के प्रति कभी भी उपेक्षित व सौतेला व्यवहार नहीं करना चाहिए। अच्छे कार्यों को करने से, स्वयं अत्यधिक सन्तोष प्राप्त होता है। हमको अपने पूर्वजों व ऋषि-मुनियों के आदर्शाे को ध्यान में रखकर भारत को विश्व गुरु बनाने में उत्कृष्ट ध्यान देते हुए, शासन द्वारा प्रदत्त कार्यों का निष्पादन करना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन डा० नवीन कुमार सिन्हा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आयोजन एवं प्रबंधन के परिप्रेक्ष्य में संस्थान की उप निदेशक डा० नीरजा गुप्ता, सरिता गुप्ता सहायक निदेशक डा० राज किशोर यादव, डा० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता, संजय कुमार, राजीव कुमार दूबे, डा० सीमा राठौर, डा० वरुण चतुर्वेदी, संकाय सदस्य धर्मेन्द्र कुमार सुमन, मोहित यादव, डा० शिव बचन सिंह यादव तथा सहयोग की दृष्टि से संस्थान से उपेन्द्र कुमार दूबे, मो० शहंशाह, मो० शाहरूख तथा अन्य  कार्मिकों का उल्लेखनीय व सराहनीय योगदान रहा है।

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