“ज़मी छोड़कर मैं किधर जाऊँगा “

ज़मी छोड़कर मैं किधर जाऊँगा अंधेरों के अन्दर उतर जाऊँगा !   गिरी पत्तियाँ सारी सुखी हुई नये मौसमों में बिखर जाऊँगा !   अगर…

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